Key Points:
- 18 वर्ष की आयु में जुड़ने पर केवल 55 रुपये मासिक अंशदान।
- 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 3000 रुपये पेंशन।
- सरकार भी लाभार्थी के बराबर योगदान करती है।
Key Points:
- 18 वर्ष की आयु में जुड़ने पर केवल 55 रुपये मासिक अंशदान।
- 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 3000 रुपये पेंशन।
- सरकार भी लाभार्थी के बराबर योगदान करती है।
प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना: देश में बड़ी संख्या में ऐसे श्रमिक हैं जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और जिनके पास बुढ़ापे के लिए कोई निश्चित आय का साधन नहीं होता। ऐसे कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना शुरू की है।
यह योजना विशेष रूप से घरेलू कामगारों, रिक्शा चालक, मजदूर, धोबी, हथकरघा कर्मी, निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों और अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बनाई गई है। योजना का उद्देश्य वृद्धावस्था में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
कितनी राशि जमा करनी होगी?
प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना का लाभ 18 से 40 वर्ष तक की आयु के लोग ले सकते हैं। लाभार्थी की उम्र के अनुसार मासिक अंशदान तय किया जाता है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रतिमाह जमा करने होते हैं, जबकि 40 वर्ष की आयु में जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रतिमाह का अंशदान देना पड़ता है।
इस योजना की खास बात यह है कि जितनी राशि लाभार्थी जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके खाते में योगदान के रूप में जमा करती है। यानी सरकार और लाभार्थी दोनों बराबर योगदान देते हैं।
60 साल के बाद मिलेगी पेंशन
योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3000 रुपये की सुनिश्चित पेंशन दी जाती है। यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलता रहता है।
यह योजना उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद मानी जा रही है जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपये या उससे कम है और जो भविष्य के लिए नियमित बचत नहीं कर पाते।
प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना आवेदन प्रक्रिया
प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना में शामिल होने के लिए पात्र व्यक्ति नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आवेदन कर सकता है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बचत बैंक खाता या जनधन खाते की जानकारी आवश्यक होती है।
रजिस्ट्रेशन के समय पहली किस्त जमा करनी होती है। इसके बाद निर्धारित राशि स्वतः बैंक खाते से कटती रहती है। यदि किसी कारणवश किस्त जमा नहीं हो पाती तो बाद में निर्धारित पेनल्टी के साथ भुगतान किया जा सकता है।
योजना से बाहर निकलने की सुविधा भी दी गई है। यदि कोई लाभार्थी समय से पहले योजना छोड़ना चाहता है तो उसे जमा राशि और निर्धारित ब्याज वापस मिल सकता है। यही वजह है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बीच इस योजना को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है।
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